शिक्षण के स्तर || shikshan ke star

शिक्षण के स्तर 



शिक्षण एक जटिल प्रक्रिया है जो किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए की जाती है शिक्षण कक्षा में विभिन्न कार्यों को संपन्न कराने की व्यवस्था है जिसका उद्देश्य छात्रों को सीखने के लिए प्रेरित करना है शिक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत पाठ्यवस्तु एक महत्वपूर्ण उपागम है एक ही पाठ्यवस्तु को विद्यालय में विभिन्न स्तरों पर पढ़ाया जाता है क्योंकि पाठ्यवस्तु का अपना स्वरूप होता है जिससे शिक्षण के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती है शिक्षण की पूरी प्रक्रिया को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है


  1.  स्मृति स्तर
  2.  बोध स्तर
  3.  चिंतन स्तर




 स्मृति स्तर शिक्षण


यह शिक्षण स्तर का प्रथम अवस्था है स्मृति स्तर के शिक्षण में विचारहीनता पाई जाती है इस स्तर में सूचनाओं को याद करना मुख्य लक्ष्य होता है इस स्तर में ऐसी अधिगम परिस्थितियों विकसित की जाती हैं जिससे छात्र की पढ़ाई गई पाठ वस्तु को सरलता से याद कर सके सार्थक एवं संबंधित पाठ्यवस्तु को याद करना काफी आसान होता है जबकि निरर्थक वस्तुओं को याद रखना काफी कठिन होता है सूचनाओं को याद करने का संबंध बुद्धि से नहीं होता परंतु स्मृति का बहुत जगह काफी योगदान रहता है जैसे कविता पाठ, शब्दार्थ, पहाड़े, गिनती या भाषा में वर्तनी, व्याकरण ऐतिहासिक घटनाओं का शिक्षण स्मृति स्तर पर ही आधारित होता है इसीलिए स्मृति स्तर का पूर्णतया बहिष्कार संभव नहीं है

स्मृति स्तर के शिक्षण के लिए सुझाव



  1. पाठ्यवस्तु में सभी चीजे सार्थक होनी चाहिए जिससे याद करने में सरलता हो
  2. पाठ्यवस्तु को विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए
  3. पाठ्यवस्तु तार्किक रूप से क्रमबद्ध होना चाहिए
  4. अभ्यास के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए
  5.  थकान के समय शिक्षा ना किया जाए
  6. पुनर्बलन प्रणाली का प्रयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए
  7. इस स्तर पर शिक्षण केवल ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य तक ही सीमित रखना चाहिए





बोध स्तर शिक्षण


शिक्षा में बोध एक बहुत व्यापक शब्द है बोध का प्रयोग तीन पक्षों को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है


  1. विभिन्न तत्वों में संबंध देखने के लिए
  2. तथ्यों के संचालन के स्वरूप को देखने के लिए
  3. तथ्यों के संबंध तथा संचालन दोनों में समन्वय करने के लिए

बोध स्तर का शिक्षण शुरू करने के लिए यह आवश्यक है कि इसके पूर्व स्मृति स्तर पूर्ण हो चुका हो इसके बिना बोध स्तर का शिक्षण नहीं हो सकता शिक्षक इस स्तर पर शिक्षण प्रक्रिया को अर्थपूर्ण और सार्थक बनाता है बोध स्तर के शिक्षण में शिक्षक छात्रों के समक्ष पाठ्यवस्तु को इस प्रकार प्रस्तुत करता है कि छात्रों को बोध के लिए अधिक से अधिक अवसर मिले और छात्र मैं आवश्यकता अनुसार समझ उत्पन्न हों इस प्रकार पूरी शिक्षण प्रक्रिया में छात्र और शिक्षक दोनों काफी सक्रिय रहते हैं बोध स्तर का शिक्षण उद्देश्य केंद्रित रहता है

बोध स्तर के शिक्षण के लिए सुझाव



  1. स्मृति स्तर के पूर्ण हो जाने के बाद ही बोध स्तर शुरू करना चाहिए
  2. शिक्षकों को छात्रों के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना चाहिए उन्हें आवश्यकतानुसार स्वतंत्रता देनी चाहिए
  3. प्रत्येक समस्या को क्रमबद्ध तरीके से हल करना चाहिए
  4. सभी कक्षा चक्रों के मध्य एक निश्चित अंतर होना चाहिए
  5. शिक्षण व्यवस्था के अनुसार समाधान करना चाहिए
  6. छात्रों को शिक्षण के लिए अभिप्रेरणा देनी चाहिए





 चिंतन स्तर शिक्षण


यह तीसरा और अंतिम स्तर हैं चिंतन मानव के विकास का एक महत्वपूर्ण है इस स्तर पर शिक्षक अपने छात्रों को चिंतन करना, तर्क करना, कल्पना शक्ति को बढ़ाने का प्रयास करते हैं इस स्तर में स्मृति स्तर और बोध स्तर दोनों ही सम्मिलित होते हैं स्मृति स्तर और बोध स्तर के बिना चिंतन स्तर सफल नहीं हो सकता। चिंतन स्तर में शिक्षण समस्या केंद्रित होता है इस स्तर में शिक्षक छात्रों के सामने एक समस्या प्रस्तुत कर देता है और छात्र चिंतन के माध्यम से इस समस्या का स्वयं समाधान खोजने की कोशिश करते हैं यह शिक्षण का सर्वोच्च स्तर है और यह पूर्णता विचार पर आधारित हैं।

चिंतन स्तर के शिक्षण के लिए सुझाव



  1. चिंतन स्तर शुरू करने से पहले स्मृति स्तर और बोध स्तर जरूर पूर्ण हो जाने चाहिए
  2. छात्रों की आकांक्षाएं उच्च होनी चाहिए
  3. छात्रों में प्रेम, सहानुभूति और सहनशीलता होनी चाहिए
  4. समस्या की अनुभूति होनी चाहिए
  5. चिंतन स्तर का महत्त्व छात्रों को पता होना चाहिए
  6. छात्रों में धैर्य अवश्य होने चाहिए



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