यथार्थवाद का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत, उद्देश्य

यथार्थवाद का अर्थ (Meaning of Realism)




यथार्थवाद अंग्रेजी शब्द 'Realism' का हिंदी रूपांतरण है Realism दो शब्दों से मिलकर बना है Real+ism। Real शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द से मानी जाती है जिसका अर्थ 'वस्तु' तथा ism का अर्थ- वाद। इस प्रकार Realism का शाब्दिक अर्थ है वस्तुवाद अथवा वस्तु के अस्तित्व के संबंध में विचारधारा अतः यथार्थवाद वस्तु के अस्तित्व को स्वीकार करता है और वस्तु की वास्तविकता पर बल देता है यह विचारधारा भौतिकवाद पर आधारित है भौतिकवाद के अनुसार केवल भौतिक जगत ही सत्य है इस प्रकार यथार्थवाद का सिद्धांत है जो जगत को उसी रूप में स्वीकार करता है जिस रूप में वह दिखाई पड़ता है या अनुभूति किया जाता है








यथार्थवाद की परिभाषाएं (Definition Of Realism)


जेम्स एस. रॉस के अनुसार– यथार्थवाद का सिद्धांत स्वीकार करता है कि हमारे प्रत्यक्षीकरण के उद्देश्य के पीछे और उनसे मिलता-जुलता वस्तुओं का एक वास्तविक संसार है

ब्राउन के अनुसार– यथार्थवाद का मुख्य विचार यह है कि सब भौतिक वस्तुएं या बाह्य जगत के पदार्थ वास्तविक हैं और उनका अस्तित्व देखने वाले से प्रथक है यदि उनको देखने वाले व्यक्ति न हो, तो भी उसका उनका अस्तित्व होगा और वे वास्तविक होंगे

बटलर के अनुसार– यथार्थवाद विश्व की अपनी सामान्य स्वीकृति का पुनर्बलन है जिस रूप में वह हमें हमारे समक्ष होता है

स्वामी रामतीर्थ के अनुसार– यथार्थवाद का अर्थ वह विश्वास या सिद्धांत है जो जगत को वैसे ही स्वीकार करता है जैसा कि हमें दिखाई देता है

 यथार्थवाद के सिद्धांत (Principles Of Realism)


1.आंगिक सिद्धांत (Theory of Organism)– यथार्थवाद व्यवस्था है जो सदैव आंगिक है इसका प्रत्येक भाग स्वयं एक सक्रिय व्यवस्था है एक समन्वित प्रक्रिया है यह केवल परिणाम नहीं है वरन स्वयं कारण भी है संसार विकास की प्रक्रिया में एक तरंगित अवयव है परिवर्तन इस तरंगित विश्व का आधारभूत गुण है सत्य, वास्तविकता की सार तत्व प्रक्रिया है मन को अवयवी के कार्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए

2.मानव के वर्तमान व व्यवहारिक जीवन पर बल (Emphasis on Present and Practical Life of Man)– यथार्थवादी उन आदर्शों, नियमों एवं मूल्यों को कोई महत्व नहीं देते हैं जिनका संबंध वर्तमान एवं व्यवहारिकता से नहीं है इसके साथ ही वे बौद्धिकता तथा आदर्शवादियों का विरोध करते हैं

3.यथार्थवाद, पारलौकिकता को अस्वीकार करता है (Realism does not accept Trancedentalism)– यथार्थवाद प्रत्यक्ष जगत को ही सब कुछ मानता है इसके अनुसार इस लोक से परे कोई वस्तु नहीं है इस प्रकार यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं वस्तुनिष्ठता पर बल देता है वस्तुतः यथार्थवाद अपनी प्रक्रिया में वैज्ञानिक है

4.वस्तु जगत में नियमितता (Regularity in Object World)– यथार्थवादी भौतिक जगत की नियमितता को आधार मानते हैं उनका मानना है कि भौतिक जगत में जो कुछ भी परिवर्तन होते हैं उनमें सतत नियमितता पाई जाती है अतः यही नियमितता मानव के अनुभव एवं ज्ञान प्राप्ति में होनी चाहिए तभी यथार्थ ज्ञान हो सकता है

5.इंद्रिय ज्ञान की यथार्थता (Reality Of Sensory Knowledge)– यथार्थवाद का अन्य सिद्धांत इंद्रिय ज्ञान की यथार्थता है उनका विचार है कि वास्तविक ज्ञान की प्राप्ति केवल इंद्रियों के माध्यम से ही होती है क्योंकि इंद्रियां संवेदनशील होती हैं

6.दृश्य जगत की यथार्थता (Reality Of Phenominal World)– यथार्थवाद का प्रमुख सिद्धांत दृश्य जगत की यथार्थता है क्योंकि वह दृश्य जगत को ही सत्य प्रदार्थ मानते हैं उनके विचार में इस संसार में हम जो कुछ भी देखते हैं सुनते हैं अथवा अनुभव प्राप्त करते हैं वही सत्य है अर्थात जो प्रत्यक्ष है वही उसी का अस्तित्व है






यथार्थवादी शिक्षा की प्रमुख विशेषताएं (Characteristics of Realism educaion)


1.प्रायोगिक जीवन पर आधारित– यथार्थवादी किसी ज्ञान को तब तक स्वीकार नहीं करते हैं जब तक कि वह प्रयोग द्वारा उसके निरीक्षण एवं परीक्षण की कसौटी पर नहीं कर लेते यथार्थवादी सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करते उनका संपूर्ण जीवन प्रायोगिकता पर आधारित होता है

2.विज्ञान पर आधारित– यथार्थवादियो ने बालक को महत्वपूर्ण तथा व्यवहारिक ज्ञान देने के लिए पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक विषयों के समावेश पर बल दिया है क्योंकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली विज्ञान पर आधारित है अतः यथार्थवादी शिक्षक की आधारशिला विज्ञान पर रखी गई है

3.व्यवसायिक शिक्षा पर बल– यथार्थवाद उदार शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक शिक्षा पर बल देते हैं

4.उदार शिक्षा पर बल– यथार्थवाद ने उदार शिक्षा पर अधिक बल दिया जाता है

5.इंद्रिय ज्ञान की मुख्य द्वार हैं– यथार्थवादियों के अनुसार इंद्रियों के द्वारा ही ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है इस प्रकार यथार्थवादी इंद्रियों की सहायता से शिक्षा में सहायक सामग्री तथा दृश्य श्रव्य साधनों के प्रयोग एवं महत्व को बढ़ाया है

6.प्रकृतिक तत्वों व सामाजिक संस्थाओं का महत्व– यथार्थवादी शिक्षा में विषयों की अपेक्षा प्राकृतिक तत्व एवं सामाजिक संस्थाओं को महत्व प्रदान किया गया है

7.विस्तृत व व्यावहारिक पाठ्यक्रम– यथार्थवाद ने शिक्षा के पाठ्यक्रम को विस्तृत बनाया यथार्थवादियो ने पाठ्यक्रम को विस्तृत ही नहीं बनाया बड़न उसका वास्तविक जीवन से भी संबंध जोड़ा इसके पाठ्यक्रम में विभिन्न व्यवहारिक विषयों को स्थान प्रदान करें कि उसे व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया है

यथार्थवाद और शिक्षा के उद्देश्य (Realism and Aims Of Education)


1.सामाजिक विकास का उद्देश्य– व्यक्ति को बुद्धिमान एवं विवेकशील बनाना जिससे व्यक्ति जीवन को सफल और उपयोगी बना सके तथा समाज की उन्नति में सहयोग दे सकें

2.समृद्धि एवं सुखी जीवन के लिए तैयार करना– समृद्ध एवं सुखी जीवनयापन के लिए बालकों को तैयार करना यथार्थवादी शिक्षा का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य है यथार्थवादियों का मानना है कि बालकों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें वह भौतिक जगत में जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम हो सके और समृद्धि एवं सुखी जीवन व्यतीत कर सकें

3.व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करना– यथार्थवादी शिक्षा का अन्य उद्देश्य लोगों को व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करना है ताकि वह व्यवसायिक जीवन प्राप्त कर के भावी जीवन में समायोजन कर सके और समृद्धि एवं सुखी जीवन व्यतीत कर सकें

4.ज्ञानेंद्रियों को प्रशिक्षित करना– यथार्थवादी शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य ज्ञानेंद्रियों को प्रशिक्षित करना है यथार्थवादियों का मानना है कि बालक के मस्तिष्क में ज्ञान को ठूँसा नहीं जा सकता ज्ञानेंद्रियों को प्रशिक्षित करके वस्तुओं के प्रत्यक्ष निरीक्षण से प्राप्त अनुभव द्वारा यथार्थ ज्ञान कराना चाहिए

5.वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना– वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकास करना यथार्थवादी शिक्षा का एक अन्य मुख्य उद्देश्य है यथार्थवादियों का मानना है कि यथार्थ में सत्य को कारण एवं प्रभाव की कसौटी पर रखकर उसका विश्लेषण करने और सिद्ध करने में दक्ष बनाया जाना चाहिए जिससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न हो सके इसके लिए आवश्यक है कि बालकों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए

6.प्राकृतिक एवं सामाजिक वातावरण का ज्ञान कराना– यथार्थवादी शिक्षा का उद्देश्य प्राकृतिक एवं सामाजिक वातावरण का ज्ञान बालों को को कराना है ताकि वह यथार्थ जीवन में प्रकृति एवं सामाजिक वातावरण के साथ समायोजन कर सकें

7.वास्तविक जीवन की तैयारी– यथार्थवादी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बालक को वास्तविक जीवन के लिए तैयार करना है यथार्थवादी भौतिक पदार्थ एवं भौतिक संसार को यथार्थ मानते हैं और भौतिक जीवन को ही वास्तविक समझते हैं इसीलिए यथार्थवादी वास्तविक जीवन में दैनिक व्यवहारिक समस्याओं के निराकरण के लिए बालक को वास्तविक जीवन के लिए शिक्षा द्वारा तैयार करने के पक्षधर हैं






 यथार्थवाद और पाठ्यक्रम (Realism and Curriculum)


यथार्थवादी ज्ञान को अपने लिए ही प्राप्त करने के आदर्श को महत्व प्रदान करते हैं यथार्थवादी ज्ञान को मन और वस्तुओं का ऐसा संबंध मानते हैं जिसमें वस्तुओं पर ज्ञान का कोई प्रभाव नहीं पड़ता सत्य तो सत्य है चाहे माननीय उसकी खोज की हो अथवा नहीं सत्य को सत्यापन की कोई आवश्यकता नहीं है किंतु यदि इसका सत्यापन हो जाता है तो मानव को सत्य के संबंध में ज्ञान हो जाता है अतः यथार्थवादी ज्ञान को प्राप्त करना एक सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम के सुव्यवस्थित अध्ययन पर केंद्रित करते हैं यथार्थवादियो ने पाठ्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित विचार प्रस्तुत किए हैं

1.जीवन में उपयोगी– पाठ्यक्रम जीवन की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यापक होना चाहिए इसके लिए सभी यथार्थवादी एकमत हैं उनका मानना है कि पाठ्यक्रम में जीवन से संबंधित एवं उपयोगी सभी विषयों को स्थान दिया जाना चाहिए

2.रुचिकर– यथार्थवादी विभिन्न विषयों के उपयोगी एवं रुचिकर विषयों के चयन की स्वतंत्रता बालकों को मिलनी चाहिए जैसे की यथार्थवादी पाठ्यक्रम में 25-30 विषयों को स्थान देने के पक्षधर हैं ऐसी स्थिति में बालको को अपनी रूचि के अनुरूप उपयोगी विषयों के चयन की स्वतंत्रता दी जानी आवश्यक है

3.मातृभाषा की अनिवार्यता– यथार्थवादियो ने पाठ्यक्रम में मातृभाषा की शिक्षा को अनिवार्यता प्रदान की है ताकि मातृभाषा द्वारा बालक अपने व्यवहारिक ज्ञान को ग्रहण कर सके

4.व्यावसायिकता पर बल– यथार्थवादियों का मानना है कि पाठ्यक्रम में व्यवसायिक पाठ्यक्रम को व्यवसायिक बनाना चाहिए उनमें अनेक वेबसाइट विषयों का समावेश होना चाहिए जिसके फलस्वरूप बालक को व्यवसायिक आ सके

5.वैज्ञानिकता पर आधारित– यथार्थवादियों के अनुसार जीवन की वास्तविक परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के दृष्टिगत प्रकृति, विज्ञान एवं व्यवसाय आदि विषयों को पाठ्यक्रम में प्रमुखता प्रदान की जाए जिससे बालक जीवन की आने वाली परिस्थितियों का सामना कर सके।

यथार्थवाद और शिक्षण विधियां (Realism and Methods of Teaching)


  1. आगमन विधि 
  2. ज्ञानेंद्रिय प्रशिक्षण 
  3. अभ्यास विधि 
  4. भृमण विधि 
  5. सरल से जटिल की ओर 
  6. स्थूल से सूक्ष्म की ओर 
  7. निश्चित से अनिश्चित की ओर 
  8. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर 
  9. प्रशिक्षण एवं आत्मविश्वास पर बल





यथार्थवाद के गुण (Merits Of Realism)


  1. यथार्थवादियो ने शिक्षा के क्षेत्र में बल को अत्यधिक महत्व दिया है 
  2. यथार्थवादियो ने बालकों को प्रभावात्मक अनुशासन में रहने पर बल दिया है यथार्थवादी शिक्षण पद्धतियों ने शिक्षण क्षेत्र में अपना सहयोग देकर प्राचीन विधियों के स्थान पर प्रयोग करके भारी बदलाव किया है 
  3. यथार्थवाद वर्तमान समय में उपस्थित है उसे सत्य मानता है पाठ्य विषयों की वैज्ञानिकता पर बल देता है यथार्थवाद सुनी एवं कही बातों पर ध्यान नहीं देता वह परीक्षण करता है उसके पश्चात प्रमाणिक निष्कर्षों को सत्य मानता है 
  4. यथार्थवादियो ने इंद्रियों को ज्ञान का प्रमुख द्वार माना है 
  5. विस्तृत व व्यवहारिक पाठ्यक्रम पर बल दिया है 

यथार्थवाद के दोष (Demerits Of Realism)


  1. यथार्थवाद प्रभावात्मक अनुशासन पर बल देता है जबकि निम्न कक्षाओं के बालकों पर प्रभावात्मक अनुशासन द्वारा नियंत्रण नहीं रखा जा सकता है 
  2. यथार्थवाद बालक को आवश्यकता से अधिक महत्व देता है यथार्थवाद परीक्षण एवं निरीक्षण के पश्चात ही सत्य को स्वीकार करता है 
  3. प्रत्येक स्थिति एवं वस्तु का निरीक्षण एवं परीक्षण संभव नहीं है 
  4. यथार्थवाद वैज्ञानिक पाठ्यक्रम पर बल देता है इसमें कला एवं साहित्य पर ध्यान ही नहीं दिया गया है जबकि जीवन में सौंदर्य बोध के लिए कला और साहित्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण है 
  5. यथार्थवाद जीवन की यथार्थ आवश्यताओ एवं भावनाओं को ही महत्व देता है इसमें कल्पना, संवेग आदि अस्तित्व को नकार दिया गया है 
  6. यथार्थवाद ने भौतिक जगत को ही सत्य माना है आध्यात्मिक जगत की सत्ता को कोई महत्व नहीं दिया है

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