शान्ति शिक्षा का अर्थ, उद्देश्य, पाठ्यक्रम

 शान्ति शिक्षा (Peace education)



 शान्ति शिक्षा वह विज्ञान है, जो मानव को मौलिक आवश्यकताओं तथा समाज की यथार्थ प्रकृति या स्वरूप का अध्ययन करता है, जिसमें इन आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। यह शिक्षा या विज्ञान लोगों को मानव अधिकारों के विषय में जागरूक बनाता है। शान्ति शिक्षा वह शिक्षा है, जो अशोषित तथा न्यायप्रिय समाज का निर्माण करती है।

के. एस. बासवराज के अनुसार "शान्ति शिक्षा एक कार्यक्रम एवं प्रक्रिया है, जिससे लोगों (नवयुवक तथा प्रौढ़ों) में शान्ति के मूल्य की सराहना तथा समझदारी की भावना का विकास किया जाता है। यह वह तैयारी है, जिससे सामुदायिक जीवन को न्यायप्रिय, व्यवस्थित तथा सामंजस्यपूर्ण बनाया जाता है।"

डॉ. मर्सी अब्राहम के अनुसार "शान्ति शिक्षा शान्तिप्रिय लोगों के लिए शिक्षा है, जो कि इस पृथ्वी पर शान्ति कायम करने के योग्य होंगे।... यह विशेषत: भावात्मक शिक्षा है। यह धार्मिक शिक्षा है। साथ ही यह स्वयं में शिक्षा है। "

शान्ति शिक्षा के चार भेद किये जा सकते हैं 

(अ) युद्ध-निवारक शिक्षा

(ब) शान्ति शिक्षा मुक्ति है। इस शिक्षा के द्वारा मानवाधिकारों की प्रोन्नति मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सामाजिक गरीबी, सामाजिक भेदभाव, कुपोषण, निरक्षरता तथा रोगों को समस्याओं का समाधान किया जाता है। 

(स) शान्ति शिक्षा सीखने की प्रक्रिया है। यह शिक्षा शैक्षिक पर्यावरण के माध्यम से व्यक्तियों में सहिष्णुता तथा सृजनात्मकता का विकास करती है। 

(द) शान्ति शिक्षा एक जीवन-शैली है। यह लोगों की जीवन-शैली में परिवर्तन लाकर अन्तर्राष्ट्रीय समाज में शान्ति की स्थापना करती है।

शान्ति शिक्षा के उद्देश्य (Objectives of Peace Education)

डॉ. पी. वी. नायर ने शान्ति शिक्षा के निम्नलिखित तीन उद्देश्यों पर बल दिया है

(1) छात्रों को धार्मिक सहिष्णुता, अन्य प्रजातियों का आदर तथा धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों को आदर की दृष्टि से देखने के योग्य बनाना।

(ii) छात्रों में उदार मस्तिष्क, विवेकपूर्ण चिन्तन तथा विश्वव्यापी ज्ञान की खोज के लिए रुचि विकसित करना। 

(iii) छात्रों में सह-अस्तित्व की भावना का विकास करना। 

प्रो. के. एस. वासवराज ने शान्ति शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्यों पर बल दिया

1. शान्तिप्रिय मानव के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।

2. मानव-जीवन में शान्ति के मूल्य को समझने तथा उसकी सराहना करने के लिए छात्रों को तत्पर बनाना।

3. युवकों में शान्ति के आध्यात्मिक मूल्यों को विकसित करना, जिससे उन्हें आन्तरिक शान्ति या मन की शान्ति प्राप्त हो सके।

4. बच्चों में उपयुक्त एवं अनुपयुक्त तथा न्याय एवं अन्याय के विषय में जागरूकता विकसित करना।

5. छात्रों में अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना तथा भ्रातृत्व का विकास करना।

6 युद्ध, हिंसा, संघर्ष आदि के परिणामों से अवगत कराना, जिससे वे उनसे बचने के लिए कदम उठाने में समर्थ हो सकें।

7. छात्र को परिवार, देश तथा विश्व में शान्ति कायम रखने में उनको भूमिका के प्रति जागरूक बनाना।

शान्ति शिक्षा का पाठ्यक्रम (Peace education curriculum)

प्रो. के. एस. साइमन ने विद्यालय के विभिन्न शिक्षा के पाठ्यक्रम को इस प्रकार निर्धारित किया है

प्राथमिक स्तर

1. जीवन के नैतिक मूल्यों से सम्बन्धित कहानियाँ, कविताएँ तथा नाटक। 

2. विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों तथा संस्कृतियों से सम्बन्धित कहानियाँ।

जूनियर स्तर

1. महात्मा गाँधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, विनोबा भावे, अब्राहम लिंकन, मार्टिन लूथर किंग, कार्लमार्क्स, नेल्सन मण्डेला, मदर टेरेसा, जीसस क्राइस्ट, गौतम बुद्ध की जीवनियाँ तथा शान्ति स्थापना में उनके कार्य । 

2. ईसाई धर्म, हिन्दू धर्म, इस्लाम तथा बुद्ध धर्म की विश्व शान्ति की स्थापना में भूमिका ।

हाईस्कूल स्तर

(i) शान्ति की अवधारणा

(ii) शान्ति की आवश्यकता एवं महत्त्व

(iii) परिवार, समाज तथा विश्व में शान्ति कायम करने के साधन 

(iv) संयुक्त राष्ट्रसंघ, यूनेस्को, रेडक्रास, स्काउट एवं गाइड आन्दोलन अन्तर्राष्ट्रीय सन्थियाँ, विश्व शान्ति में विभिन्न दर्शनों की भूमिका । 

(v) युद्ध एवं हिंसा के कारण एवं उनके परिणामों की समालोचना।

पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाएँ/व्यावहारिक अनुभव 

(i) यू. एन. ओ. दिवस, पृथ्वी दिवस, शान्ति दिवस आदि का मनाना।

(ii) जूनियर रेडक्रास तथा स्काउटिंग एवं गाइडिंग की क्रियाओं में भाग लेना। 

(iii) सामाजिक वानिकी श्रमदान आदि में भाग लेना। 

(iv) पेन-मित्रता कायम करना, साथ ही बच्चों द्वारा फोटो, चित्र, कलेण्डर, स्टाम्प, सिक्के आदि का आदान-प्रदान।

(v) शैक्षिक फिल्मों का प्रदर्शन जिससे छात्रों के मानसिक अन्तरिक्ष को उत बनाया जा सके।

(vi) महान् विभूतियों के जन्म दिवस मनाना।

(vii) अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों पर सिम्पोजियम, वाद-विवाद प्रतियोगिता, संसद आदि का आयोजन करना 

(Viii) विभिन्न विषयों पर देश तथा विदेश के विजिटिंग प्रोफेसरों के भाषणों का आयोजन करना ।

(ix) शान्ति के दूतों की एलबम तैयार करना। 

अनौपचारिक शिक्षा पद्धति में शान्ति शिक्षा का पाठ्यक्रम (Peace Education Course in Non-formal Education System)

अनौपचारिक शिक्षा प्रणाली में शान्ति शिक्षा के पाठ्यक्रम में निम्नलिखित क्षेत्रों को स्थान प्रदान किया जाना चाहिए 

1. शान्तिवाद की अवधारणा- यह सिद्धान्त शान्ति में आस्था तथा युद्ध के प्रति घृणा पर आधारित है। यह मानव जीवन की पवित्रता में आस्था रखता है। 

2. शान्ति शक्ति- गाँधी जी का सत्याग्रह' तथा विनोबा भाव का भूदान आन्दोलन' इस सिद्धान्त पर आधारित है। अत: इनका ज्ञान दिया जाये।

3. विश्व मानव की अवधारणा- यह सिद्धान्त विश्व नागरिकता तथा व्यापक अन्तर्राष्ट्रीयता पर आधारित है। इसमें संकुचित राष्ट्रवाद के दोषों एवं दुष्परिणामों को बताकर विश्व नागरिकता की स्थापना पर बल दिया जाये।

4. आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा उत्पादन का विकेन्द्रीकरण- इसमें गांधीजी के आर्थिक दर्शन का ज्ञान कराया जाये और उनके सर्वोदय' समाज की कल्पना को बताया जाये। साथ ही 'अपरिग्रह' के सिद्धान्त से अवगत कराया जाये।

5. नागरिक शिक्षा।

6. शक्ति का लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण- इसमें प्लेटो के नगर-राज्यों, गाँधीजी के 'ग्राम्य राज' तथा विनोबा भावे के ग्रामदान' की अवधारणाओं से व्यक्तियों को अवगत कराया जाये।

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