ई लर्निंग का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, उद्देश्य, प्रकार, विधियां

 ई लर्निंग का अर्थ





इलेक्ट्रॉनिक लर्निंग को संक्षिप्त रूप में ई लर्निंग कहते हैं इसका शाब्दिक अर्थ है ऐसे अधिगम या सीखने से है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, माध्यमों या साधनों की सहायता से संपादित किया जाता है ई लर्निंग में सभी प्रकार के आधुनिक  इलेक्ट्रॉनिक साधनों जैसे- सीडी रोम, डीवीडी, टेलीकॉन्फ्रेंसिंग, इंटरनेट वेबसाइट पर उपलब्ध पाठ्यपुस्तक, सहायक सामग्री आदि का प्रयोग शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में किया जाता है छात्रों को उत्तम सुविधाएं और गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं विशिष्ट रूप से विश्वविद्यालयों में ई लर्निंग केंद्रों की स्थापना पर बल दिया जाता है जिससे हजारों लाखों विद्यार्थियों को एक साथ सामग्री तथा अन्य सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं






 ई लर्निंग की परिभाषाएं


केनेट के अनुसार- ई लर्निंग एक प्रतिभाशाली शिक्षण अधिगम प्रक्रिया है जिसकी रचना डिजिटल शिक्षण सामग्री, स्थानीय समुदाय, ट्यूटर तथा वैश्विक समुदाय की सहायता व संपर्क द्वारा संयुक्त रूप से होती है

रोजेनबर्ग के अनुसार- ई लर्निंग से तात्पर्य इंटरनेट तकनीकियों के ऐसे उपयोग से है जिन से विविध प्रकार के ऐसे रास्ते खुले जिनके द्वारा ज्ञान और कार्यक्षमता में वृद्धि की जा सके

टॉम केली तथा सिसको अनुसार- ई लर्निंग द्वारा अभीसूचना संप्रेषण की सहायता से शिक्षा तथा प्रशिक्षण दिया जाता है प्रशिक्षण की क्रियाएं, छात्र के अधिगम एवं प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का उल्लेख नहीं किया जाता छात्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान तथा कौशल उत्तम ढंग से प्रदान किया जाता है

रोसनवर्ग के अनुसार- ई लर्निंग में इंटरनेट प्रणाली का उपयोग किया जाता है इंटरनेट तकनीकी से पाठ्यवस्तु का संचार किया जाता है जिससे ज्ञान में वृद्धि की जाती है और छात्रों की निष्पत्तियों में वृद्धि होती है






ई लर्निंग की विशेषताएं एवं प्रकृति


  1. ई लर्निंग एक प्रगतिशील प्रत्यय है इसमें नित नए आयाम सर्जन होते रहते हैं जैसे मोबाइल लर्निंग 
  2. ई लर्निंग समकालिक या असमकालिक हो सकती है अर्थात इसे कई रूपों में प्रयोग किया जा सकता है 
  3. ई लर्निंग के लिए अध्यापक तथा छात्रों की तकनीकी का ज्ञान आवश्यक है 
  4. ई लर्निंग बिना बिजली के साधन के बिना निष्क्रिय हो जाती है 
  5. ई लर्निंग इंटरनेट सेवाओं तथा वेब सुविधाओं के बिना संभव नहीं है 
  6. इस प्रणाली का प्रयोग विभिन्न कंपनियां भी अपने स्टाफ को प्रशिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर करती हैं 
  7. ऑनलाइन शिक्षा परंपरागत शिक्षा से काफी सस्ती व प्रभावशाली है 
  8. ई लर्निंग में इंटरनेट या वेब संबंधी संप्रेषण सेवाओं जैसे- ईमेल, ऑडियो वीडियो कॉन्फ्रेंस, लाइव चैट का प्रयोग किया जाता है 
  9. ई लर्निंग में कंप्यूटर सेवाओं की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है 
  10. ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से आप देश विदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से घर बैठे ही कोई कोर्स कर सकते हैं  और परीक्षाएं भी ऑनलाइन दे सकते हैं 
  11. आर्थिक रूप से कमजोर व दूरदराज के छात्रों के लिए यह प्रणाली अधिक उपयोगी है इसके माध्यम से पढ़ाई कराना काफी उपयोगी रहता है 
  12. ई लर्निंग में ग्राफिक्स, एनिमेशन और मल्टीमीडिया के उपयोग से शिक्षण सामग्री को और अधिक रोचक और असरदार बनाया जा सकता है


ई लर्निंग के प्रकार



ई लर्निंग के मुख्य प्रकार निम्न है


  1. ऑनलाइन अधिगम 
  2. मिश्रित अधिगम 
  3. सिंक्रोनस अधिगम 
  4. एसिंक्रोनस अधिगम 
  5. स्वाध्याय 
  6. वेब आधारित अधिगम 
  7. कंप्यूटर आधारित अधिगम 
  8. दृश्य श्रव्य टेप द्वारा अधिगम





ई लर्निंग के उद्देश्य


ई लर्निंग के उद्देश्य निम्न है


  1. इसके उपयोग से वृहद अधिगम तकनीकी का विकास करना 
  2. ई लर्निंग से उच्च शिक्षा को मितव्यई बनाना 
  3. ई लर्निंग से शोध अध्ययनों की तीव्रता में वृद्धि करना 
  4. ई अधिगम से शिक्षा प्रक्रिया की व्यवस्था करना 
  5. ई अधिगम से मिश्रित माध्यमों को प्रोत्साहित करना 
  6. ई अधिगम से शिक्षा का सभी को समान अवसर प्रदान करना 
  7. ई अधिगम से मुक्त रूप से सीखने का अवसर प्रदान करना 
  8. ई अधिगम से पाठ्यवस्तु का संचार तथा संप्रेषण करना 
  9. ई अधिगम से स्थानीय समुदाय तथा भूमंडल लिए समुदाय को शिक्षा की सुविधा प्रदान करना


ई अधिगम की विधियां


1.विषमकालिक संप्रेषण तकनीकी (Asynchronous Communication method)- इस प्रकार के संप्रेषण में शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों एक साथ उपस्थित नहीं होते अध्ययन सामग्री पहले से ही वेब पेज और सीडी या डीवीडी में रिकॉर्ड होती है विद्यार्थी किसी भी समय अपनी सुविधा एवं गति के अनुसार उसका प्रयोग कर सकता है तथा दिए हुए कार्य को पूरा करके ई-मेल या वेब के माध्यम से शिक्षक को प्रेषित कर सकता है

2.समकालिक संप्रेषण विधि (Synchronous Communication method)- इस संप्रेषण तकनीकी में के अंतर्गत शिक्षक तथा विद्यार्थी दोनों ही एक निश्चित समय विशेष में इंटरनेट पर ऑनलाइन चैटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए उपस्थित होते हैं इस प्रकार के संप्रेषण शिक्षक को अपने विद्यार्थी के साथ आवश्यक सूचनाओं, अधिगम सामग्री इत्यादि में भागीदारी करने का अवसर प्रदान करता है विद्यार्थी अपनी समस्याओं के समाधान हेतु प्रश्न पूछ सकते हैं तथा शिक्षकों द्वारा प्रतिपुष्टि प्राप्त कर सकते हैं







 ई लर्निंग की सीमाएं


  1. ई लर्निंग अधिगम व्यवस्था में परंपरागत कक्षा शिक्षण की भांति सामाजिक संबंधों को संपर्क का अवसर प्राप्त नहीं होता उन्हें ना तो साथी विद्यार्थियों के साथ वार्तालाप का अवसर मिलता है ना ही शिक्षकों के साथ इसके साथ ही जिस प्रकार का मार्गदर्शन पृष्ठपोषण निदानात्मक कक्षा व्यवस्था में संभव होता है वैसा ई लर्निंग में नहीं हो सकता 
  2. आज मल्टीमीडिया कंप्यूटर, इंटरनेट, वेब टेक्नोलॉजी इत्यादि का दुरुपयोग किए जाने के कारण अध्यापक माता-पिता तथा समाज के अन्य वर्ग भी ई लर्निंग के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं 
  3. परंपरागत कक्षा शिक्षण की तुलना में बालकों के व्यक्तित्व का उचित विकास करने में यह अपेक्षित सहयोग प्रदान करने में सहायक नहीं है 
  4. ई लर्निंग के लिए आवश्यक है कि शिक्षक एवं छात्र सभी के पास कंप्यूटर लैपटॉप मल्टीमीडिया इंटरनेट इत्यादि की सुविधा उपलब्ध हो जिससे विद्यालय, घर एवं अन्य अधिगम स्थानों पर उसका लाभ उठा सकें जो सभी के लिए संभव नहीं है 
  5. ई लर्निंग में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को मल्टीमीडिया कंप्यूटर इंटरनेट तथा वेब टेक्नोलॉजी के प्रयोग में दक्ष होना चाहिए इसके अभाव में ई लर्निंग संभव नहीं है 
  6. ई लर्निंग को प्रयोग में लाने के लिए शिक्षकों तथा शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता होती है विद्यालय प्रशासन यहां तक कि शिक्षकों में भी कोई इसके लिए पर्याप्त उत्साह देखने को नहीं मिलता वे परंपरागत शिक्षण से हटकर कुछ करने में रुचि नहीं लेते इसे भार समझते हैं

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