क्रियात्मक तथा मौलिक अनुसंधान में अंतर

क्रियात्मक तथा मौलिक अनुसंधान में अंतर (Difference Between Action and Fundamental Research)













आधार
क्रियात्मक अनुसंधान
मौलिक अनुसंधान
उद्देश्य
विद्यालय तथा कक्षा शिक्षण की प्रणाली में सुधार एवं विकास करना
नए तथ्यों तथा सत्य की खोज करना तथा नवीन सिद्धांतों का प्रतिपादन करना
अनुसंधानकर्ता
शिक्षक, प्राचार्य, प्रशासन तथा विद्यालय निरीक्षक हो सकते हैं
शोधकर्ता को विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि लेना आवश्यक होता है
संबंध
समस्या से प्रत्यक्ष संबंध होता है
यह आवश्यक नहीं है कि उसका समस्या से प्रत्यक्ष संबंध हो
समस्या
समस्या का रूप संकुचित होता है कक्षा, विषय तथा विद्यालय तक सीमित होता है समस्या का व्यवहारिक रूप होता है समस्या का बाह्य मूल्यांकन नहीं होता है
समस्या का रूप अधिक व्यापक एवं मौलिक होता है इसका स्वरूप सैद्धांतिक होता है
परिकल्पना
परिकल्पनाओं का प्रतिपादन कारणों के विश्लेषण पर आधारित होता है
परिकल्पनाओं का प्रतिपादन पूर्व शोध के निष्कर्ष पर, सिद्धांतों पर तथा अनुभव पर आधारित होता है
रूपरेखा
क्रियात्मक अनुसंधान की रूपरेखा लचीली होती है शोधकर्ता को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती
मौलिक अनुसंधान की रूपरेखा लचीली नहीं होती है शोधकर्ता को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है
प्रदत्तों का संकलन
प्रदत्तों के संकलन में निरीक्षण प्रविधि तथा शिक्षक निर्मित परीक्षाओं को प्रयुक्त किया जाता है प्रमाणिक परीक्षा भी प्रयुक्त की जा सकती है निरीक्षण प्रविधि का प्रयोग अधिक किया जाता है
प्रदत्तों के संकलन में विश्वसनीय तथा वैद्य एवं प्रमाणिक परीक्षाओं को प्रयुक्त किया जाता है अपेक्षित परीक्षण उपलब्ध ना होने पर शोधकर्ता उनका निर्माण करता है और उसे प्रमाणित बनाता है
सामान्यीकरण एवं निष्कर्ष
कार्यविधि की समस्या के समाधान का व्यवहारिक रूप होता है
सामान्यीकरण नए तथ्यों, सत्यों, तथा सिद्धांतों के रूप में होता है
मूल्यांकन
शिक्षक स्वयं निर्णय लेता है कि इस समस्या के समाधान में कहां तक सफलता मिली है शिक्षक को सफलता मिलने पर पुनर्बलन मिलता है
मूल्यांकन बाह्य होता है विशेषज्ञ नियुक्त किए जाते हैं अच्छे कार्य के लिए उपाधि प्रदान की जाती है
अर्थव्यवस्था
शिक्षक स्वयं साधन जुटाता है प्रसार सेवा विभाग की भी क्रियात्मक अनुसंधान के लिए सहायता प्रदान करता है
अनुसंधानकर्ता स्वयं व्यवस्था करता है उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा राष्ट्रीय शैक्षिक प्रशिक्षण अनुसंधान परिषद (NCERT) से आर्थिक सहायता मिलती है
क्षेत्र
क्रियात्मक अनुसंधान का क्षेत्र संकुचित होता है किसी विद्यालय तथा कक्षा शिक्षण की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है क्षेत्र स्थानीय होता है
मौलिक अनुसंधान क्षेत्र अधिक व्यापक होता है सभी विद्यालयों तथा अधिकांश कक्षा शिक्षण की समस्या होती है क्षेत्र विस्तृत होता है
महत्त्व
शिक्षक को कार्यकुशलता का अवसर मिलता है अपनी कार्यप्रणाली में सुधार तथा विकास करता है
शिक्षा की समस्याओं का अध्ययन करके व्यवहार विज्ञान का विकास किया जाता है शोधकर्ता में शिक्षा की समस्याओं के प्रति सूझबूझ का विकास होता है






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